नई दिल्ली, 17 अप्रैल । दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को ईस्ट विनोद नगर स्थित डीटीसी डिपो से 200 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने दिल्ली-रोहतक अंतरराज्यीय ई-बस सेवा की शुरुआत की। इसका रूट आईएसबीटी कश्मीरी गेट/पीरागढ़ी से टिकरी बॉर्डर होते हुए बहादुरगढ़ और रोहतक तक निर्धारित किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने मदनपुर खादर बस टर्मिनल का लोकार्पण और ईस्ट विनोद नगर स्थित डिपो के नव-निर्मित प्रशासनिक भवन का भी उद्घाटन किया। कार्यक्रम में दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज एक साथ चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया। नई बसों में बड़ी संख्या देवी बसों की है, जो दूरस्थ और संकरी गलियों तक पहुंचकर आम नागरिकों को बेहतर परिवहन सुविधा प्रदान करेंगी। साथ ही दिल्ली-रोहतक अंतरराज्यीय बस सेवा के शुभारंभ से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी। मुख्यमंत्री ने मदनपुर खादर बस टर्मिनल के उद्घाटन को यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा बताया, जिससे परिवहन सेवाएं अधिक व्यवस्थित होंगी।
उन्होंने ईस्ट विनोद नगर डिपो में नव-निर्मित प्रशासनिक भवन के उद्घाटन का भी उल्लेख किया और कहा कि बेहतर सुविधाओं से कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इस भवन में बायोमेट्रिक सिस्टम और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई है, जिससे चालक सुरक्षित और स्वस्थ स्थिति में बसों का संचालन कर सकें और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति देश की सबसे प्रभावी और व्यापक नीतियों में से एक है। अगले चार वर्षों के लिए 4000 करोड़ रुपये का विशाल बजट निर्धारित किया गया है, जिसके तहत न केवल निजी वाहनों को प्रोत्साहन और रोड टैक्स में छूट दी जा रही है, बल्कि अब स्कूल बसों और वाणिज्यिक वाहनों को भी चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक में बदलने की योजना तैयार है।
मुख्यमंत्री ने बताया होलंबी कलां क्षेत्र में एक विशाल ‘ईवी वेस्ट डिस्पोजल प्लांट’ स्थापित किया जाएगा ताकि भविष्य में ई-वाहनों की बैटरियों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर प्रकृति को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने दोहराया कि दिल्ली सरकार ‘क्लीन, ग्रीन और सतत’ परिवहन प्रणाली के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और ये सभी प्रयास दिल्ली को सुरक्षित, तेज और प्रदूषण मुक्त भविष्य की ओर ले जाएंगे।
परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि आज दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक बसों के क्षेत्र में अग्रणी बन चुका है और हम इस बेड़े को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होने कहा कि दिल्ली-रोहतक जैसी इंटरस्टेट सेवाओं का विस्तार हमारी कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। डीटीसी परिवार की मेहनत और समर्पण के परिणामस्वरूप पिछले वर्ष की तुलना में आय में लगभग 173 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि नई 200 बसों के साथ ही राजधानी में कुल बस बेड़ा लगभग 6300 से अधिक हो गया है, जिसमें 4500+ इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं, जिससे दिल्ली देश का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक बस बेड़ा रखने वाला शहर बन गया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028-29 तक इस संख्या को बढ़ाकर लगभग 14,000 बसों तक पहुंचाना है। ये बसें सीसीटीवी कैमरा, पैनिक बटन, रियल-टाइम ट्रैकिंग और दिव्यांगजनों के लिए अनुकूल सुविधाओं से सुसज्जित हैं।
मदनपुर खादर बस टर्मिनल : मदनपुर खादर (कालिंदी कुंज मेट्रो स्टेशन के निकट) स्थित आधुनिक बस टर्मिनल में 3 बस बे और 2 यात्री शेड की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, साथ ही एक समय में लगभग 6 बसों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है। यात्रियों की सुविधा के लिए टॉयलेट और पास सेक्शन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। दिव्यांगजन के लिए विशेष रूप से अनुकूल रैंप बनाया गया है तथा जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) प्रणाली भी स्थापित की गई है। इस टर्मिनल से विभिन्न रूटों पर बस सेवाओं का संचालन प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत रूट संख्या 465 के तहत मदनपुर खादर टर्मिनल से सफदरजंग टर्मिनल तक 3 बसें, रूट संख्या डी-022 पर मदनपुर खादर टर्मिनल से सफदरजंग टर्मिनल के लिए 14 बसें चलाई जाएंगी। रूट संख्या डी-8802 के अंतर्गत मदनपुर खादर टर्मिनल से नेहरू प्लेस तक 5 बसों का संचालन किया जाएगा। इस टर्मिनल से कुल मिलाकर 22 बसों का संचालन प्रस्तावित है।
ईस्ट विनोद नगर बस डिपो में प्रशासनिक भवन : डिपो में नव-निर्मित प्रशासनिक ग्राउंड व प्रथम तल सहित विकसित किया गया है, जिसमें कुल 23 कक्ष हैं, जिनमें प्रशासनिक कक्ष, कैंटीन तथा विश्राम कक्ष भी शामिल हैं। भवन में दिव्यांगजन के लिए अनुकूल सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। साथ ही अग्नि सुरक्षा के दृष्टिकोण से 50 हजार लीटर क्षमता का फायर टैंक स्थापित किया गया है तथा जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली भी विकसित की गई है।
