नई दिल्ली, 08 मई । केंद्र सरकार ने एयरोनॉटिक्स और संबद्ध क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) की स्थापना पर के लिए उद्योग परामर्श बैठक में एयरोनॉटिक्स और संबद्ध क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) की स्थापना पर विचार-विमर्श किया।
केंद्रीय बैठक कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने बताया कि यहां राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (एनएसटीआई) में हुई बैठक में उद्योग जगत और बहुपक्षीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने पाठ्यक्रम निर्माण, प्रशिक्षण व्यवस्था, अधोसंरचना विकास और अप्रेंटिसशिप लिंक को मजबूत करने पर चर्चा की, ताकि एयरोस्पेस और संबद्ध क्षेत्रों में उभरती कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा सके।
बैठक मंत्रालय के अधीन महानिदेशालय प्रशिक्षण (डीजीटी) द्वारा राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (एनएसटीआई), कानपुर में आयोजित की । इसकी अध्यक्षता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने की, जबकि डीजीटी के महानिदेशक दिलीप कुमार, उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के निदेशक और विभिन्न उद्योगों के वरिष्ठ प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए।
बैठक में रक्षा एयरोस्पेस, सिविल एविएशन, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र की 25 से अधिक संस्थाओं ने भाग लिया। इनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), डसॉल्ट एविएशन इंडिया, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एलएंडटी प्रिसिजन इंजीनियरिंग, अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर, होंडा मोटर्स, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, जेके सीमेंट, एशियन डेवलपमेंट बैंक और विश्व बैंक जैसी संस्थाएं शामिल थीं।
बैठक में पीएम सेतु योजना के तहत अपनाए गए हब‑एंड‑स्पोक मॉडल पर भी चर्चा हुई। इस मॉडल के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के विभिन्न आईटीआई क्लस्टर जैसे अलीगंज, साकेत, पांडु नगर कानपुर, मुजफ्फरनगर, आगरा, नैनी प्रयागराज, वाराणसी और चारगांव गोरखपुर को जोड़ा गया है। बैठक में तय किया गया कि हब आईटीआई अपने नेटवर्क की स्पोक आईटीआई को मार्गदर्शन देकर क्षेत्रीय कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेंगे, प्रशिक्षण गुणवत्ता सुधारेंगे और उद्योग से जुड़ाव बढ़ाएंगे।
मंत्रालय ने बताया कि एनएसटीआई कानपुर में प्रस्तावित एनसीओई उद्योग सहयोग से विकसित होगा और उच्च स्तरीय विनिर्माण व एयरोनॉटिक्स ट्रेड्स में प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ाएगा। यह केंद्र उद्योग के सह-निवेश, भारत‑फ्रांस द्विपक्षीय सहयोग और पीएम‑सेतु ढांचे के तहत एक मॉडल संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां हर वर्ष हजारों प्रशिक्षुओं को एयरोनॉटिक्स और संबद्ध क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
