वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने कल नई दिल्ली में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रमुख परिचालन, वित्तीय और रणनीतिक प्राथमिकताओं के संबंध में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रदर्शन और प्रगति का आकलन किया गया।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन किया गया, जिसमें व्यावसायिक वृद्धि, लाभप्रदता, परिसंपत्ति गुणवत्ता, सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन, वित्तीय समावेशन, डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र, एमएसएमई ऋण प्रवाह, साइबर सुरक्षा और परिचालन जोखिम प्रबंधन जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। मंत्रालय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मजबूत वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन प्रदर्शित किया।
प्रधानमंत्री जन धन योजना, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम विश्वकर्मा और डिजिटल ऋण पहलों सहित प्रमुख वित्तीय समावेशन पहलों के तहत हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई।
विचार-विमर्श में डिजिटल बैंकिंग पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा ढांचे को बेहतर बनाने और लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा अर्थव्यवस्था के अन्य उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण तक पहुंच में सुधार करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। चर्चा में इस बात पर भी बल दिया गया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच लचीलापन बनाए रखते हुए सभी स्तरों पर विवेकपूर्ण व्यय और मितव्ययिता उपायों को अपनाना आवश्यक है।
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने सुदृढ़ शिकायत निवारण प्रणाली, मजबूत शासन मानकों और परिचालन तत्परता को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन उपायों से यह सुनिश्चित होगा कि बैंकिंग प्रणाली लचीली, भरोसेमंद बनी रहे और विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप हो।
बैठक के दौरान वित्तीय सेवा विभाग की नई वेबसाइट का भी शुभारंभ किया गया। यह पोर्टल सुगम पहुंच, सहज नेविगेशन और 23 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में सूचना के बेहतर प्रसार की सुविधा प्रदान करता है।
