सरकार ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) अभी देश भर में 16 आर्कियोलॉजिकल जगहों पर खुदाई कर रहा है, जिसमें स्ट्रक्चरल अवशेष, दफ़न की हुई चीज़ें, मिट्टी के बर्तन और कई तरह की पुरानी चीज़ें मिली हैं।
संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, खुदाई में सिक्के, मोती, गहने, खेती के औजार और हड्डियों से बनी चीज़ें मिली हैं। जहाँ भी ज़रूरत होती है, खुदाई में मिले सैंपल को साइंटिफिक वैलिडेशन के लिए खास संस्थाओं को भेजा जाता है।
सरकार ने कहा कि ASI ने पिछले पांच सालों में 121 खुदाई की परमिशन दी हैं। सबसे ज़्यादा परमिशन 2022-23 में दी गईं, जिसमें 31 अप्रूवल मिले, इसके बाद 2025 में 25, 2021-22 में 24, 2024 में 22 और 2023 में 19 परमिशन मिलीं।
चल रही खुदाई में कई राज्यों में कई ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण जगहें शामिल हैं, जिनमें हरियाणा में राखीगढ़ी और अग्रोहा, गुजरात के भावनगर जिले में लोथल, द्वारका और जगहें, कर्नाटक में ब्रह्मगिरी और कमलापुरा, महाराष्ट्र में एलीफेंटा द्वीप, ओडिशा में सारी देउल कॉम्प्लेक्स और जौगड़ा, उत्तर प्रदेश में पिपराहवा (गंवरिया), बिहार में बलिराजगढ़, तेलंगाना में जनमपेट और तमिलनाडु में कुमारिककलपलायम शामिल हैं।
चल रहे प्रोजेक्ट्स में, हरियाणा के राखीगढ़ी में खुदाई पर सबसे ज़्यादा ₹2.16 करोड़ खर्च हुए हैं, इसके बाद अग्रोहा (₹1.26 करोड़), द्वारका (₹1.01 करोड़) और महाराष्ट्र में एलीफेंटा आइलैंड (₹99.17 लाख) का नंबर आता है। दूसरी साइट्स पर खुदाई का काम अलग-अलग स्टेज पर है और काम के स्कोप के हिसाब से खर्च अलग-अलग हो रहा है।
मंत्रालय ने संसद को यह भी बताया कि पिछले पांच सालों में ASI के किसी भी आर्कियोलॉजिकल खुदाई प्रोजेक्ट को जारी रखने या बंद करने के बारे में कोई कोर्ट ऑर्डर जारी नहीं किया गया है।
यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।
