भारत ने 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी का अपना पहला स्वदेशी डिस्पोजेबल टर्बो जेट इंजन विकसित किया है। इस इंजन को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के गैस टरबाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (जीटीआरई) ने विकसित किया है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि डीआरडीओ के डिजाइन पर आधारित इस तरह की जटिल प्रणाली का विकास भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को दर्शाता है। मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि वर्षों की सटीक इंजीनियरिंग, उन्नत विनिर्माण और भारत के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक समुदायों के बीच घनिष्ठ सहयोग का परिणाम है। मंत्रालय ने आगे कहा कि जेट इंजन प्रौद्योगिकी को विश्व की सबसे परिष्कृत इंजीनियरिंग विधाओं में से एक माना जाता है।
इस इंजन का सफल निर्माण किया गया और बुधवार को आज़ाद इंजीनियरिंग द्वारा इसे जीटीआरई को सौंप दिया गया। इसे आज़ाद इंजीनियरिंग के सीईओ राकेश चोपड़ा ने विशिष्ट वैज्ञानिक और महानिदेशक (एयरोनॉटिकल सिस्टम्स) डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन और उत्कृष्ट वैज्ञानिक और जीटीआरई के निदेशक डॉ. एस.वी. रामनामूर्ति को सौंपा।
इस अवसर पर रक्षा सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने जीटीआरई और उसके उद्योग भागीदार को बधाई देते हुए कहा कि उनके सहयोग ने इस परिकल्पना को एक ऐतिहासिक मील के पत्थर में बदल दिया है।
