एनसीपी में अजित पवार की बागवत के इतने दिनों बाद भी कोई दावे के साथ यह कहने की स्थिति में नहीं है कि शरद पवार के साथ कितने और अजित पवार के साथ एनसीपी के कितने सांसद और विधायक हैं। विधानसभा और लोकसभा के मॉनसून अधिवेशन में ऐसे कई मौके आए जब इस बारे में दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता था। दोनों ही तरफ से ऐसा कुछ होने नहीं दिया गया। जाहिर है कि परिवार और पॉलिटिक्स इन दो नावों पर पैर रखकर शरद पवार सफर कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह सत्ता का मोह है। देश और राज्य में सत्ता चाहे किसी की भी हो, पवार परिवार और उनकी पार्टी एनसीपी की कोशिश अपना हिस्सा रिजर्व रखने की है। पवार खुद विपक्ष में धुरी बने रहना चाहते हैं और 2024 में बीजेपी के सत्ता में आने की स्थिति में अपने परिवार और पार्टी के लिए सत्ता का दरवाजा भी खुला रखना चाहते हैं।
गलत क्या है?
पुणे में एक उद्योगपति के बंगले पर शरद पवार और अजित पवार की गुप्त मुलाकात की खबर वायरल होने के बाद शरद पवार ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह बैठक गुप्त नहीं थी। पवार ने कहा कि मैं पवार परिवार में सबसे बड़ा हूं और अजित पवार मेरा भतीजा है। परिवार के लोगों का मुझसे आकर मिलना या परिवार के लोगों को मेरे द्वारा मिलने के लिए बुलाए जाने में गलत क्या है? यह सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं हो सकता।
बार-बार मुलाकात के क्या मायने?
शपथ ग्रहण के कुछ दिन बाद अजित पवार का दल यशवंतराव चव्हाण केंद्र गया और शरद पवार से मुलाकात की। यह मुलाकात एक बार नहीं, बल्कि दो बार हुई। उस समय प्रफुल्ल पटेल ने मीडिया से कहा था कि यह बैठक इसलिए की गई ताकि शरद पवार हमें आशीर्वाद दें और पार्टी में कोई विभाजन न हो। लेकिन शरद पवार ने कड़ा रुख अपना लिया है कि वह बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे।
NCP कभी BJP के साथ नहीं जाएगी
शरद पवार ने बातचीत में जहां अजित पवार से मुलाकात को लेकर उपरोक्त टिप्पणी की, वहीं लगे हाथ यह भी साफ कर दिया कि एनसीपी कभी भी बीजेपी के साथ नहीं जाएगी। पवार ने कहा कि हमारे कुछ साथी बीजेपी के साथ चले गए हैं लेकिन मैं पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं, इसलिए हमारी मूल पार्टी है और मूल पार्टी कभी बीजेपी के साथ नहीं जाएगी, क्योंकि बीजेपी की नीति हमारी पार्टी के सिद्धांतों से मेल नहीं खाती।
बीजेपी पर फिर मढ़े आरोप
शरद पवार ने बीजेपी पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। पवार ने कहा कि बीजेपी जिस तरह से सत्ता का दुरुपयोग कर रही है, वह देश की जनता को पसंद नहीं है। भविष्य में इसके परिणाम देखने को मिलेंगे। पवार ने कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए विपक्ष के नेताओं को ईडी के नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मणिपुर का मुद्दा देश के लिए महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने संसद में अपने भाषण में इस पर अपनी बात रखी है, लेकिन जनता और देश के मुद्दों पर ज्यादा संवेदनशीलता से देखने और काम करने की जरूरत है, जो नहीं हो रहा है। प्रधानमंत्री को सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मुद्दे पर ज्यादा गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
इंडिया की बैठक में बनेगी रणनीति
पवार ने कहा कि इंडिया गठबंधन की 31 अगस्त और 1 सितंबर को मुंबई में जो बैठक हो रही है, उसमें आगामी रणनीति तय होगी। उन्होंने कहा कि इस बैठक में वे खुद, उद्धव ठाकरे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के 35 से 40 वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे। शरद पवार ने यह भी कहा कि राज्य की जनता जल्द ही महाविकास आघाडी के हाथ में राज्य की सत्ता सौंपेगी।
