मुंबई : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संघ के खिलाफ उनके पुराने बयान को लेकर एक निचली अदालत में दोबारा शुरू किए गए मानहानि के आपराधिक मामले के विरुद्ध बांबे हाई कोर्ट में दस्तक दी है। उनके खिलाफ यह ताजा केस संघ के एक कार्यकर्ता ने अतिरिक्त दस्तावेजों के आधार पर किया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को अपनी यह याचिका एकल जज जस्टिस एसवी कोतवाल के समक्ष सुनवाई के लिए पेश हुई।
नए दस्तावेज के आधार पर केस दर्ज
राहुल ने अपनी इस याचिका में दावा किया कि 2021 में हाई कोर्ट की एक अन्य खंडपीठ ने शिकायतकर्ता राजेश कुंटे को इस मामले में नए दस्तावेज शामिल करने की अनुमति नहीं दी थी। लेकिन महाराष्ट्र के ठाणे के भिवंडी की एक जिला अदालत ने इसी साल जून में कुंटे को नए दस्तावेज जमा करने की अनुमति दे दी।
इस पर जस्टिस कोतवाल ने कहा कि चूंकि वर्ष 2021 में हाई कोर्ट की एक समकक्ष बेंच ने कुंटे की याचिका पर सुनवाई की थी। इसलिए बेहतर होगा कि वही खंडपीठ राहुल गांधी की इस याचिका की भी सुनवाई करे। उन्होंने गांधी के वकील कुशाल मोर से कहा कि मैं अपीली याचिका की समीक्षा करूं इससे बेहतर है कि वही जज इस मामले की सुनवाई करे।
2015 में राहुल की याचिका हो चुकी है खारिज
राहुल गांधी ने अपनी याचिका में दावा किया कि मजिस्ट्रेट के आदेश से कुंटे का इस स्टेज पर नए दस्तावेज जमा करना पूरी तरह से अवैध और प्रतिकूल है। कुंटे ने अपने मानहानि के अभियोग में दावा किया है कि राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक के खिलाफ झूठा और अपमानजनक बयान दिया है।
उन्होंने संघ को महात्मा गांधी की हत्या का जिम्मेदार होने का आरोप लगाया है। उल्लेखनीय है कि कुंटे के जमा किए दस्तावेजों में गांधी के 2014 के दायर किए मामले के कुछ अंश हैं जिन्हें अब भिवंडी अदालत ने शामिल कर लिया है। हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका को वर्ष 2015 में खारिज कर दिया था।
