मुंबई, । मराठा समाज को कुनबी करार देने की मांग कर रहे आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल की मांगों पर विचार करने के लिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। यह समिति एक माह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उधर, अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल ने कहा है कि वह गुरुवार को सुबह 11 बजे बताएंगे कि वे अपना अनशन खत्म करेंगे या नहीं
मराठा समाज का मूल व्यवसाय कृषि
मनोज जरांगे पाटिल 29 अगस्त से जालना में अपने कुछ साथियों के साथ अनशन कर रहे हैं। एक सितंबर को आंदोलनकारियों एवं पुलिस के बीच हिंसक झड़प भी हो चुकी है। जरांगे की मांग मराठा समाज को कुनबी समाज का जाति प्रमाण पत्र दिए जाने की है। वह कहते हैं कि मेरे आंदोलन को अनायास मराठा आरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि मराठावाड़ा सहित संपूर्ण महाराष्ट्र में मराठा समाज का मूल व्यवसाय कृषि है।1960 से पहले मराठा समाज को कुनबी समाज का प्रमाणपत्र दिया जाता था। लेकिन, संयुक्त महाराष्ट्र का गठन होने के बाद यह प्रमाणपत्र मिलना बंद हो गया है। वह यह भी कहते हैं कि जब तक मराठवाड़ा निजाम हैदराबाद की रियासत का हिस्सा था, तब तक मराठों को आरक्षण मिलता था।उस समय के कई प्रमाण और दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। वह कहते हैं कि हमारा मराठा समाज कुनबी में आता है, जोकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का हिस्सा है। इसलिए, हमें ओबीसी कोटा के तहत ही आरक्षण चाहिए। इसका सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मराठा आरक्षण विवाद से कोई मतलब नहीं है।पांच सदस्यीय समिति बनाने का निर्णय कियाजरांगे के आंदोलन के कारण एक सितंबर को जालना में पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के बाद से राज्य सरकार दबाव में है। शरद पवार, उद्धव ठाकरे, उदयनराजे भोसले जैसे कई वरिष्ठ नेता उनसे मिलने जा चुके हैं। इसलिए, जालना लाठीचार्ज के बाद पहली बार बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मनोज जरांगे पाटिल की मांगों पर विचार हुआ और मुख्यमंत्री ने एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति बनाने का निर्णय किया।
