भारत के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र ने पिछले वित्त वर्ष में 25 गीगावाट स्थापित करके अब तक की सबसे अधिक क्षमता वृद्धि हासिल की है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कल नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में इस क्षेत्र में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में 18.57 गीगावाट की वृद्धि हासिल की गई। मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अक्षय ऊर्जा में देश की यात्रा का नेतृत्व सौर ऊर्जा ने किया, जो पिछले वित्त वर्ष में 15 से बढ़कर लगभग 21 गीगावाट हो गई। उन्होंने कहा कि इसमें लगभग 38 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई। श्री जोशी ने कहा कि परिवहन क्षेत्र और घरेलू घरों को कार्बन मुक्त करने के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस और पाइप्ड प्राकृतिक गैस के साथ संपीड़ित बायोगैस के मिश्रण के लिए बायोसीएनजी की शुरूआत अनिवार्य की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान भारत की सौर पीवी सेल निर्माण क्षमता भी 9 गीगावाट से लगभग तीन गुना बढ़ गई। उन्होंने बताया कि पीएम कुसुम योजना ने भी भौतिक और वित्तीय दोनों ही पहलुओं के संदर्भ में अच्छी प्रगति की है। श्री जोशी ने इस बात पर भी जोर दिया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के शुभारंभ के बाद से 1.1 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला है और पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 7 लाख रोजगार सृजित हुए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के विकास की सराहना की है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों को एक बड़ी उपलब्धि बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये उपलब्धियां देश के नागरिकों की स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
