प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत अब तक 32 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा के 52 करोड़ से ज़्यादा लोन स्वीकृत किए जा चुके हैं। यह योजना 2015 में शुरू की गई थी, ताकि गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि लघु और सूक्ष्म उद्यमों को दस लाख रुपये तक के बिना किसी गारंटी के लोन मुहैया कराया जा सके। इसका उद्देश्य वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और उद्यमियों को सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत तीन तरह के लोन दिए जा रहे हैं। इसमें 50,000 रुपये तक के शिशु लोन, पांच लाख रुपये तक के किशोर लोन और दस लाख रुपये तक के तरुण लोन शामिल हैं।
आज नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने कहा कि कल इस योजना को एक दशक पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि 68 प्रतिशत मुद्रा ऋण महिला उद्यमियों द्वारा लिए गए हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्वतंत्रता बढ़ी है और लैंगिक समानता में योगदान मिला है। उन्होंने कहा कि इस योजना ने हाशिए पर पड़े समूहों में आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ावा दिया है, जिससे उन्हें उद्यमिता के माध्यम से अपनी आजीविका बनाए रखने में सक्षम बनाया गया है। एससी, एसटी और ओबीसी उद्यमियों को सभी मुद्रा ऋणों का 50 प्रतिशत से अधिक प्राप्त हुआ है।
