भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) बोर्ड की बैठक में मतदान से खुद को दूर रखा, जिसमें पाकिस्तान के लिए नए बेलआउट पैकेज पर विचार किया गया। भारत ने पाकिस्तान के मामले में आईएमएफ कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर भी चिंता जताई, क्योंकि उसका ट्रैक रिकॉर्ड खराब रहा है, और साथ ही राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के लिए ऋण वित्तपोषण निधि के दुरुपयोग की संभावना पर भी चिंता जताई।
आईएमएफ ने कल एक अरब डॉलर के विस्तारित निधि सुविधा ऋण कार्यक्रम की समीक्षा की तथा पाकिस्तान के लिए 1.3 अरब डॉलर के नए लचीलापन एवं स्थायित्व सुविधा ऋण कार्यक्रम पर भी विचार किया।
बैठक में अपने वक्तव्य में भारत ने कहा कि सीमापार आतंकवाद को निरन्तर प्रायोजित करने को पुरस्कृत करना वैश्विक समुदाय को एक खतरनाक संदेश देता है, वित्तपोषण एजेंसियों और दानकर्ताओं की प्रतिष्ठा को जोखिम में डालता है, तथा वैश्विक मूल्यों का मजाक उड़ाता है।
पाकिस्तान लंबे समय से आईएमएफ से कर्जदार रहा है, जिसका क्रियान्वयन और आईएमएफ की कार्यक्रम शर्तों के पालन का ट्रैक रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है। पिछले पांच वर्षों में, 2019 से, 4 आईएमएफ कार्यक्रम हुए हैं। भारत ने कहा कि अगर पिछले कार्यक्रम एक ठोस व्यापक आर्थिक नीति वातावरण बनाने में सफल रहे होते तो पाकिस्तान एक और बेलआउट कार्यक्रम के लिए फंड से संपर्क नहीं करता।
भारत ने पाकिस्तान के मामले में आईएमएफ के कार्यक्रम डिजाइनों की प्रभावशीलता और पाकिस्तान द्वारा उनकी निगरानी या उनके कार्यान्वयन पर सवाल उठाए। आईएमएफ ने भारत के बयान और मतदान से उसके दूर रहने पर ध्यान दिया।
