दिल्ली में ई-रिक्शा से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही ज्यादा किराया चुकाना पड़ सकता है. बढ़ती महंगाई और लंबे समय से किराये में कोई बढ़ोतरी न होने के कारण इलेक्ट्रिक व्हीकल फेडरेशन (Electric Vehilce Federation) ने न्यूनतम किराया बढ़ाने का फैसला लिया है. तालकटोरा स्टेडियम में ई-रिक्शा चालकों, डीलरों और मैन्युफैक्चरर्स की संयुक्त बैठक के बाद यह घोषणा की गई. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक, डीलर और निर्माता अपनी मांगों को लेकर शामिल हुए थे.
फेडरेशन के चेयरमैन अनूज शर्मा ने बताया कि दिल्ली में 2010 से ई-रिक्शा चल रहे हैं, लेकिन तब से अब तक इनके किराये में कोई वृद्धि नहीं हुई, जबकि ऑटो और टैक्सी के किराये दो बार बढ़ चुके हैं. बढ़ती महंगाई और न्यूनतम मजदूरी में इजाफे को देखते हुए अब मई से ई-रिक्शा का न्यूनतम किराया 20 रुपये करने का निर्णय लिया गया है.
दिल्ली में साढ़े 3 लाख से ज्यादा ई-रिक्शा
दिल्ली में इस समय 2.06 लाख से अधिक ई-रिक्शा आधिकारिक तौर पर रजिस्टर्ड हैं, जबकि करीब 1.50 लाख ई-रिक्शा बिना पंजीकरण के भी सड़कों पर चल रहे हैं. शहर में लास्ट माइल कनेक्टिविटी में इनकी अहम भूमिका है, ऐसे में किराया बढ़ने का सीधा असर लाखों यात्रियों की जेब पर पड़ेगा.
अब बल्क में नहीं होगा रजिस्ट्रेशन
इसी बीच, दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग (Delhi Transport Department) ने ई-रिक्शा सेक्टर में बड़ा नीतिगत बदलाव किया है. सरकार ने 21 अप्रैल 2022 के उस सर्कुलर को वापस ले लिया है, जिसमें कंपनियों और फर्मों को अपने नाम पर ई-रिक्शा और ई-कार्ट का थोक रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति दी गई थी. अब कंपनियां बल्क में ई-रिक्शा रजिस्टर नहीं करा सकेंगी.
