एक टेक जर्नलिस्ट होने के नाते ट्रेंड्स पर नज़र रखना, उनके असर को समझना और आगे की तस्वीर का अंदाज़ा लगाना मेरे काम का हिस्सा है। मेरा मकसद आपको कोई गैजेट या ऐप बेचना नहीं है—वह काम सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर पहले ही कर रहे हैं। लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि अगर 2025 को AI ने परिभाषित किया, तो आने वाला समय उससे भी ज़्यादा निर्णायक और चौंकाने वाला हो सकता है।
सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, कई बदलाव एक साथ
2026 किसी एक बड़ी टेक क्रांति का साल नहीं होगा। यह अलग-अलग विचारों, प्रयोगों और अधूरे वादों का मिश्रण होगा। कुछ प्रयोग नाकाम होंगे, कुछ चुपचाप हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाएंगे। जो टिकेंगे, वही पर्सनल टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया की दिशा तय करेंगे। इन बदलावों का असर सिर्फ आपकी स्क्रीन तक सीमित नहीं रहेगा—यह आपकी जेब और आपकी सोच, दोनों पर पड़ेगा।
सोशल मीडिया पर AI वीडियो अब रुकने वाले नहीं
कुछ दिन पहले इंस्टाग्राम स्क्रॉल करते हुए मेरी नज़र एक वीडियो पर पड़ी, जिसमें दो छोटे बच्चे मज़ाकिया अंदाज़ में बातचीत कर रहे थे और उन्हें गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड की तरह दिखाया गया था। ऐसे वीडियो भारत में तेज़ी से वायरल होते हैं। कई क्लिप्स देखने के बाद समझ आया कि ये असली नहीं थे—ये AI से बनाए गए वीडियो थे।
आज मेरा फीड कार्टून जैसी बिल्लियों के डांस, नकली जानवरों और पूरी तरह AI-जनरेटेड कंटेंट से भरा रहता है। पहले लोग असली शेर के बच्चों के वीडियो देखने के लिए सोशल मीडिया खोलते थे, अब उनके AI वर्ज़न भी मौजूद हैं—मज़ेदार, लेकिन भ्रम पैदा करने वाले।
जब प्लेटफॉर्म खुद और OpenAI जैसे टूल्स मिनटों में किसी भी तरह का वीडियो बनाने की सुविधा दे रहे हों, तो आम यूज़र के लिए असली और नकली में फर्क करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। भारत में तो अक्सर ऐसे कंटेंट पर कोई चेतावनी भी नहीं होती। यहीं से ‘हकीकत’ की परिभाषा धीरे-धीरे धुंधली होने लगती है।
आने वाले समय में सवाल यह नहीं रहेगा कि आप सच पहचान पा रहे हैं या नहीं, बल्कि यह कि AI वीडियो हमारे रिश्तों, भरोसे और दुनिया को देखने के नज़रिए को कैसे बदल देंगे।
स्मार्टफोन और लैपटॉप: टेक महंगी क्यों होती जा रही है
साल की शुरुआत से ही संकेत मिल रहे हैं कि स्मार्टफोन और लैपटॉप की कीमतें बढ़ने वाली हैं—और यह बढ़ोतरी अस्थायी नहीं होगी। आज भी एक औसत स्मार्टफोन कई लोगों की महीने की कमाई के बराबर कीमत पर आता है। EMI विकल्प मौजूद हैं, लेकिन कुल खर्च कम नहीं होता।
इसकी बड़ी वजह मेमोरी चिप्स, खासकर DRAM की कमी है। AI डेटा सेंटर्स और स्मार्टफोन—दोनों को भारी मात्रा में मेमोरी चाहिए। मांग सप्लाई से आगे निकल चुकी है और चिप्स की कीमतें बढ़ रही हैं। बड़ी कंपनियाँ पहले AI और डेटा सेंटर्स को सप्लाई दे रही हैं, क्योंकि वहीं मुनाफ़ा ज़्यादा है।
इसका नतीजा यह होगा कि बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन या तो महंगे होंगे या फिर कम RAM के साथ आएंगे। गेमिंग लैपटॉप और दूसरे मेमोरी-हेवी डिवाइस भी इससे प्रभावित होंगे।
स्मार्ट ग्लासेस: अगली स्क्रीन आपकी आंखों पर
अब ऐप्स, कैमरा बम्प और फोन की मोटाई पर बहस से आगे बढ़ने का समय आ गया है। टेक कंपनियों की नज़र अब सीधे आपके चेहरे पर है—स्मार्ट ग्लासेस के ज़रिए।
मिक्स्ड रियलिटी हेडसेट भले ही अभी आम न हुए हों, लेकिन स्मार्ट ग्लासेस को लेकर कंपनियाँ पूरी तरह गंभीर हैं। छोटे डिस्प्ले, AI फीचर्स, कैमरा और ऑडियो-ओनली डिज़ाइन—हर तरह के विकल्प अलग-अलग कीमतों में आने वाले हैं।
Meta ने Ray-Ban और Oakley स्मार्ट ग्लासेस के ज़रिए यह साबित कर दिया है कि भले ही बाज़ार छोटा हो, लेकिन मौजूद है। आने वाले समय में स्मार्ट ग्लासेस आपके ईयरबड्स या स्मार्टवॉच की तरह स्मार्टफोन के साथी बन सकते हैं—हालांकि फोन की जगह लेने में अभी वक्त लगेगा।
आज की तारीख में स्मार्ट ग्लासेस उसी दौर में हैं, जहाँ कभी फीचर फोन हुआ करते थे।
घरों में दस्तक देंगे रोबोट
यह भविष्यवादी लग सकता है, लेकिन इस बार घरेलू रोबोट्स को लेकर बातें सिर्फ दावे नहीं हैं। इंसानों जैसे दिखने वाले रोबोट भले ही अभी आम न हों, लेकिन AI-पावर्ड होम रोबोट्स पर सिलिकॉन वैली और यूरोप में तेज़ी से काम हो रहा है।
इन रोबोट्स का मकसद कैमरा और विज़न सिस्टम की मदद से घर के अंदर घूमना, रास्ता समझना और सीमित काम करना है। 2026 की शुरुआत में होने वाले CES जैसे टेक इवेंट्स में कई बड़ी कंपनियाँ अपने होम रोबोट प्लान्स दिखा सकती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple भी एक AI-आधारित रोबोटिक डिवाइस पर काम कर रहा है।
फोल्डेबल फोन: आख़िरी मौका?
फोल्डेबल फोन दिलचस्प ज़रूर हैं, लेकिन अब तक खुद को पूरी तरह साबित नहीं कर पाए हैं। वजह हार्डवेयर नहीं, सॉफ्टवेयर है। बड़ी स्क्रीन का सही इस्तेमाल आज भी अधूरा लगता है।
अब उम्मीदें Apple से जुड़ गई हैं। अगर कंपनी फोल्डेबल iPhone लाती है और iOS व iPadOS के बेहतरीन फीचर्स को एक साथ जोड़ती है, तो यह कैटेगरी को नई दिशा दे सकती है। बेहतर मल्टीटास्किंग, डेस्कटॉप-ग्रेड ऐप्स और सही UI ही फोल्डेबल फोन को वाकई उपयोगी बना सकते हैं।
